ramniwas guru

Tuesday, 24 January 2012

VEER TEJAJI YUVA SAMITY,DAIKARA by ramniwas choudhary (guru)


जाट ईतिहास

satyawadi veer tejaji maharaj
श्रुणु देवि जगद्वन्दे सत्यं सत्यं वदामिते।
जटानां जन्म कर्माणि यन्न पूर्व प्रकाशितं॥
महाबला महावीर्या महासत्व पराक्रमतमा।
सर्वाग्रे क्षौत्रिया जट्टा देव कल्पा दृढ़वृता:॥
सृष्टेरादौ महामाये वीर भद्रस्य शक्तित:।
कन्यानांहि दक्षस्य गर्भे जाता जट्टा महेश्वरी।
गर्व खर्मोन्न विप्राणां देवानां च महेश्वरी।
विचित्र विस्मयं सत्यं पौराणिकै: संगोपितं॥

अर्थ कृमहादेव ने पार्वती से कहा कि हे जगजननी भगवती! जाट जाति के जन्म
कर्म के विषय में उस सच्चाई का कथन करता हूँ जो अभी तक किसी ने भी
प्रकाशित नहीं किया। ये जट्ट बलशाली, अत्यन्त वीर्यवान प्रचंड पराक्रमी
हैं सम्पूर्ण क्षत्रियों में यही जाति सर्वप्रथम शासक हुई। ये देवताओं के
समान दृढ़ संकल्प वाले हैं। सृष्टि के आदि में वीरभद्र की योगमाया के
mahadev(lord shiva)
प्रभाव से दक्ष की कन्याओं से जाटों की उत्पत्तिा हुई। इस जाति का इतिहास
अत्यन्त विचित्र एवं विस्मयजनक है। इनके उज्ज्वल अतीत से ब्राह्मणों और
देवताओं के मित्याभिमान का विनाश होता है इसीलिए इस जाति के सच्चे इतिहास
को पौराणिकों ने अभी तक छिपाये रखा था।
जाट शब्द का प्रयोग आदिकाल से होता आया है। आदि सृष्टि में देवाधिदेव
भगवान आदि शासक सम्राट हुये। भगवान शंकर की जटा से उत्पन्न होने के कारण
ही इस समुदाय का नाम जाट पड़ा है। भगवान शिव के गुणों की साद्रश्यता जाटों
में आज तक विद्यमान है। भगवान महादेव शंकर की जटाओं से निसृत
ब्रह्मपुत्र, गंगा, यमुना, सरस्वती, सतलज, ब्यास, रवि, चिनाब, झेलम,
गोदावरी, नर्मदा इत्यादि से उर्वरित भूमि जाटों की मातृभूमि विशेषतया रही
है।
पर्यावरण की पवित्रता तथा स्वास्थ्य रक्षा के लिये इस जाति के लोग
परमयाज्ञीक हैं, देव पूजा, संगती करण, दान करना उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति
हे। भगवान शिवजी से जाटों की उत्पत्ति का युक्ति प्रमाण से विस्तार
ramniwas choudhary(guru)(B.A.,B.ed.)
पूर्वक वर्णन है। रघुवंशी राजाओं, चंद्रवंशी राजाओं के वैवाहिक सम्बन्ध,
राज्य प्रबन्धों, सुरक्षित वैभव सम्पन्न प्रजाओं का विशद आख्यान,
पूर्वकथित जाटों जैसे गुण मिथिलाधिपीत जनक विदेह और दिलीप, भगवान श्री
रामचंद्र, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न में थे। जाट समाज मर्यादा पुरुषोत्ताम
भगवान श्री रामचंद्र को अपना पूर्वज और पूजनीय मानकर उनके गुणों की
स्तुति करते हैं। महाभारत काल की रीति-नीति, चाल-चलन, वैवाहिक प(ति तथा
जाट संघटन अपने वंशज पांडवों की परम्परा से चले आ रहे हैं। तथा उस समय के
गणतंत्र निर्माता योगेश्वर श्री कृष्ण चन्द्र की गणतंत्र रूप पंचायतों के
न्याय की मान्यता जाटों में है।
महाभारत काल तक जाट शब्द समुदाय वाचक था। इसके पश्चात अन्य जातियों की
भाँति इसका प्रयोग जन्मगत जाति के रूप में प्रचलित हो गया। जाटों ने अपनी
वैभवशाली परम्परा एवं वीरोचित कार्यों से इतिहास के कुछ पृष्ठों पर
साधिकार आधिपत्य किया है। जाट सदैव शौर्य एवं वीरता के प्रतीक रहे हैं।
कुछ लेखक जाटों को आर्यों की संतान मानते हैं, कुछ हैहय क्षत्रियों की
स्त्रियों के गर्भ से ब्राह्मणों द्वारा उत्पन्न घोषित करते हैं, कुछ
इन्डोसिथियन जातियों के साथ इनका सम्बन्ध स्थापित करते हैं। कुछ शिव की
जटा से उत्पन्न मानते हैं। कुछ युधिष्ठर की पदवी जेष्ठ से जाट उत्पन्न
हुआ मानते हैं कुछ जटित्का को जाट जाति का आदि श्रोत ठहराते हैं। कुछ
इन्हें विदेशों से आया हुआ जिट, जेटा ऐक गात ;जाटध्द मानते हैं। कुछ इनको
ययाति पुत्र यदु से सम्बन्धित मानते हैं और कुछ इनका अस्तित्व पाणिनी युग
पूर्व मानते हैं तथा आर्यों के साथ इनका अभिन्न सम्बन्ध स्थापित करते
हैं।
जाटों की शारीरिक संरचना, भाषा तथा बोली उन्हें आर्य प्रमाणित करती है।
ऐसा डॉ0 ट्रम्प एवं वीम्स ने माना है। यह तय है कि जाट आर्य हैं और
प्रचण्ड वीर हैं। संसार में विभिन्न देशों में जाट प्राचीन काल से आज तक
my quit idial baby/daughter VANDANA GURU
निवास व शासन करते आये हैं भारत में बहुत प्राचीन काल से रहते आये हैं।
जाटों ने तिब्बत, यूनान, अरब, ईरान, तुक्रिस्तान, चीन, ब्रिटेन, जर्मनी,
साइबेरिया, स्कोण्डिनेलिया, इंग्लैण्ड, रोम व मिश्र आदि में कुशलता,
दृढ़ता और साहस के साथ राज्य किया था और वहाँ की भूमि को विकास-वादी
उत्पादन के योग्य बनाया था।
मालवा, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा तथा गंगा-यमुना का किनारा उनका मूल
निवास स्थल है। विदेशी आक्रमणकारियों से उन्होंने देश को बचाया है, हूणों
को परास्त किया है, देश और समाज की प्रगतिशील संस्कृति के निर्माण में
उन्होंने महान योगदान दिया है, राजा एवं पुरोहित के गठबन्धन को तोड़ा है,
इस संघर्ष में वे स्वयं टूटे हैं लेकिन मिटे नहीं, उनकी रुचि इतिहास के
निर्माण करने में रही, इतिहास लिखने का काम उन्होंने दूसरों के लिए छोड़
दिया, जिन्होंने अपना उत्तारदायित्व ईमानदारी से नहीं निभाया और जाटों की
विशेषताओं से जनसाधारण को दूर ही रखा।

Guru

Guru (गुरु) Gur (गुर) is gotra of Jats in Rajasthan.

Origin




This gotra originated from people of fair colour. Guru is also name of shresha (श्रेष्ठ) or superior people. Descendants of such people got the gotra name Guru. [1]

History

Bhim Singh Dahiya identifies Goruai of Greek with Guru/Gaur/Ghor of Indian clan.[2]

Distribution in Rajasthan

Villages in Churu district

Guru Jats live in villages:

स्वामी विवेकानंद
एक बार जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका गए थे, एक महिला ने उनसे शादी करने की इच्छा जताई। जब स्वामी विवेकानंद ने उस महिला से ये पुछा कि आप ने ऐसा प्रश्न क्यूँ किया ?

उस महिला का उत्तर था कि वो उनकी बुद्धि से बहुत मोहित है और उसे एक ऐसे ही बुद्धिमान बच्चे कि कामना है।

इसीलिए उसने स्वामी से ये प्रश्न कि क्या वो उससे शादी कर सकते है और उसे अपने जैसा एक बच्चा दे सकते हैं ?

उन्होंने महिला से कहा कि चूँकि वो सिर्फ उनकी बुद्धि पर मोहित हैं इसलिए कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा:
...
“ प्रिये महिला, मैं आपकी इच्छा को समझता हूँ। शादी करना और इस दुनिया में एक बच्चा लाना और फिर जानना कि वो बुद्धिमान है कि नहीं, इसमें बहुत समय लगेगा, इसके अलावा ऐसा हो इसकी गारंटी भी नहीं है।
इसके बजाय, आपकी इच्छा को तुरंत पूरा करने हेतु मैं आपको एक सुझाव दे सकता हूँ।

आप मुझे अपने बच्चे के रूप में स्वीकार कर लें। इस प्रकार आप मेरी माँ बन जाएँगी और इस प्रकार मेरे जैसे बुद्धिमान बच्चा पाने की आपकी इच्छा भी पूर्ण हो जाएगी।“

-: ये काम एक सुसंस्कृत भारतीय ही कर सकता है ,यह समस्त विश्व हम भारतीयों को हमारे वर्तमान तरक्की ,या नई शक्तिशाली सेना या व्यापार के लिए नहीं पसंद करता , बल्कि यह विश्व हमें हमारी 20,000 + वर्ष पुरानी संस्कृति के लिए पसंद करता है ,सिर्फ यही हमारी पहचान है ......जय हिंद

 ‎==================U R G E N T================

--------------------------------N O T I C E------------------------------
2014 के लोकसभा चुनाव” के प्रत्याशी के लिए आवेदन पत्र :

... ... 1. उम्मीदवार का नाम:————————–

2.वर्तमान पता:
... (१) जेल का नाम: ————————–
(२) सेल नंबर:—————————-
(३) कैदी नंबर ——————————

3.राजनैतिक पार्टी: ____________ _________
* आप अभी तक जिन दलों में शामिल थे उनमें से केवल पिछले पांच दलों का नाम दें।
१ ———————– २ ———————– ३ ———————– ४ ————————-
५ ————————

4.राष्ट्रीयता { गोल चक्कर करे )
१ इतालियन
२ भारतीय
३ पाकिस्तानी
४ बांग्लादेसी

5 पिछली पार्टी छोड़ने के कारण (एक या अधिक को सर्कल करें )
१-भीतरघात
२-निष्कासित
३-खरीद लिये गये
४-कोई कुर्सी नहीं मिली
५-घोटाले के कारण
६-मलाई की कमी

6.चुनाव लड़ने के लिए कारण (एक या अधिक को सर्कल करें ) :
१-पैसा बनाने के लिए
२-अदालत के मुकदमे से बचने के लिए
३-सत्ता का घोर दुरुपयोग करने के लिए
४-गरीबों को मिटाने के लिए
५-घोटाले करने के लिए
६-मैं नहीं जानता
(यदि आपका उत्तर ६ है तो अपनी विवेकशीलता के लिये एक गैर मान्यता प्राप्त गैर सरकारी रिश्वत खोर मनोचिकत्सक का प्रमाणपत्र संलग्न करें)

7.आपको कितने साल का जन सेवा का अनुभव है?
१ – 1-2 साल
२ – 2-6 साल
३ – 6-15 साल
४ – 15 + साल

8. आप के खिलाफ लंबित किसी भी आपराधिकमामले का विवरण दें (पूरी जानकारी देने के लिये आप जितने चाहे उतने अतिरिक्त पृष्ट जोड़ सकते हैं)
———————————————————————————————————————

9.आपने कितने वर्ष जेल में बिताए हैं?
(कृप्या प्रश्न 7 से भ्रमित न हों)
१ – 1-2 साल
२ – 2-6 साल
३ – 6-15 साल
४ – 15- 20 साल
५ – बीस साल से ज्यादा

10.आप किसी वित्तीय घोटाले में शामिल हैं?
१ -क्यों नहीं
२ –बेशक
३ –निश्चित रूप से
४ -खानदानी धंधा
५ -मैं इस सब से इनकार करता हूं
६ –मुझे इसमें एक विदेशी हाथ दिखाई दे रहा है

11. आपकी वार्षिक भ्रष्टाचार आय क्या है ?
१ -100-500 करोड़
२ -500-1000 करोड़
३ -कोई गिनती नहीं …
(हवाला में डालर से की गयी कमाई को रुपयों में कनवर्ट करने के बाद शामिल करें)

12. क्या आपके मन में भारत के लिए कोई भी विकास योजना है?
उत्तर: ————————————————————————————————————————————————–

13. नीचे दिये गये स्थान में अपनी उपलब्धियों का बखान करें:
उत्तर: ————————————————————————————————————————

14.इनमे से कौन से धंधे में आपकी रूचि सबसे ज्यादा है ?
१.रिश्वेत लेने में ———————
२.हेरा फैरी में ————————-
३.हवाला के धंधे में ———————-
४.दलाली करने में —————————
५.सुपारी लेने में ———————
६.अपहरण करने में ———————————–
७.उपरोक्त सभी में ———————————–

१५. आपने कितने गुंडे पाल रखे हे.
उतर ——————————————–—————————————————

यदि आप में ये सारी खूबिया है तो ही यह फॉर्म भर सकते है, अन्यथा चुनाव आयोग आपका फॉर्म रद्द कर सकता है।
 और यदि पेज कम पड़े तो सादे पेपर में लिख सकते हो और
 इसको भरने के बाद चुनाव अधिकारी को भारतीय डाक द्वारा भेज दे, पता आप को मालूम होगा।


VEER TEJAJI YUVA SAMITY,DAIKARA by ramniwas choudhary (guru)

jai maa brahamani jogmaya kuldevi maa kiasim anukampa.......


jai shree satyawadi veer tejaji maharaj ki asim karipa.........


jai gusai ji maharaj ki asim anukmapa...........


jai panch mukhi balaji maharaj(palari ranawata).......
jai shree bhomiya ji maharaj ki asim kripa.......



श्री वीर तेजाजी युवा समिति, दईकङा,श्री सत्यवादी वीर तेजाजी महाराज मँदिर युवा समितिजोधपुर-भोपालगढ रोङ,गाँव-दईकङा(देविखेङा),जालेली नायला रोङ पर स्थापित वीर तेजाजी महाराज मँदिर है




ramniwas choudhary(guru)(B.A.,B.ed.)
श्री वीर तेजाजी युवा समिति,द्वारा प्रतिवर्ष वीर तेजा दशमी को यहाँ मँदिर प्रागण मे रात्रिकालिन महाभजन सँध्या  आयोजित होती है ,भजन सँध्या मे ख्यातिप्राप्त लोककलाकारो द्वारा भजन मँङली, का सभी ग्रामवासियो के सहयोग से आयोजन होता है,हजारो की तादाद मै श्रोता भजनो का लाभ लेने पहूचते है ।वही तेजाजी मँदिर प्रागण मे मेले का आयोजन होता है ,जाट समुदाय के लोग हजारो की सख्या मे सामिल होकर तेजाजी महाराज के दर्शन कर अपने को धन्य़ करते है ।युवा समिति द्वारा वहाँ विभिन कार्य मे अपना योगदान देते है ।  आज तक भामाशाहो दवारा 30 लाख कि सहयोग राशी मिल चुकी है------------------ 
       जाट कौम जैसी मार्शल कौम के ईतिहास को अपने आने वाली भावी पीढी तक पहुचाना ।                             श्री वीर तेजाजी महाराज मँदिर खरनाल(नागौर) के बाद जोधपुर रियासत का पहला ऐतिहासिक मँदिर के रूप मे खयाति हासिल करना ।आने वाली भावी पीढी ईस मँदिर का ईतिहास मे बखान कर सके  ।कोई भी कौम का भामाशाह मँदिर मे अपनी सहयोग राशी दे सकता है
                                                                           -वीर तेजाजी मँदिर युवा समिति,दईकङा---               1  )    अध्यक्ष,            चौधरी हीराराम जी गुरू(गुरूजी) -           आयु-  91 वर्ष                                                            2  )    वयवस्थापक,     चौधरी हीराराम जी गुरू(गुरूजी) -           आयु-  91 वर्ष                                       3  )   कोषाध्यक्ष ,         चौधरी हीराराम जी गुरू(गुरूजी) -           आयु-  91 वर्ष                                 4  )  उपकोषाध्यक्ष 1,       रघुनाथ जी भांम्भु                                                                                   5  )   उपकोषाध्यक्ष 2 ,    गोकुलराम जी ढाका                                                                               
6  )   सदस्य,         सभी युवा वर्ग (वयस्क,जाट बँधु)                   प्रेषक आपका अजीज अनुज जाटबँधु    रामनिवास गुरू (बी.ए.,बी.एड ,)                              मोबाईल न. 9950577920,8764304384,   दईकङा,,(सारण नगर,बनाङ रोङ,जोधपुर)                                                     -वीर तेजाजी महाराज की जीवनी 
papaji kailash ji guru(sub.major)
 सातवी शताब्दी के सम्राट हर्षवर्धन के निधन के पश्चात भारत अनेक जनपदो मे बँट गया था ।वर्तमान नागौर क्षैत्र,जो नागवँशी जाटो के गणो की अधिकता के कारण प्राचीनकाल मे नागाणा प्रदेश कहलाता था ।इसी नागाणा प्रदेश के खरनाल गण के शासक बोहीत राम धौलिया गौत्र जाट थे ।                                                                                                                                     खरनाल गणपति बोहीत राव के पुत्र ताहणदेव की छठी सँतान के रूप मे कुँवर तेजपाल का जन्म वि.स.1130,माघ सूक्ला 14,(29-1-1074)के दिन हुआ था  , माता का नाम रामकवरी था,प्राचीनकाल मे बाल विवाह प्रतिष्ठा का सूचक था अतःएक बार जब ताहणजी पुष्कर स्नान करने गये तब वही तेजपाल का विवाह पनेर निवासी रायमलजी की पुत्री पेमल के साथ कर दिया कुवर तेजपाल जब बङे हु्ए तो उन्होने किसानो को कृषि की नई नई तकनीक बताई,पहले किसान बीज  उछाल कर खेती करते थे,हल तलाकर बीज बोने का तरीका बताया ।                                                    लोकगीत-----------((तेजा बारह ऐ कोसा री जोती आवङी))                                                                              एक बार बरसात के मौसम मे खेती करते कुवर तेजपाल अपनी भाभी के ताना मारने पर पत्नी पेमल को लाने ससुराल पनेर गये उसी रात लाछा गुजरी की गाये मैणा ले गये थे,उस समय पशुधन अमुल्य था ।लाँछा पूरे गाँव मे सहायतार्थ फिरती है मगर चौरो के भय से कोई नही सुनता,अपना कर्तव्य समझ तेजाजी क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए शस्त्र सजि्जत तेजाजी गायो की ( वार )चढ जाते चौरो का पिछा करते है उसी वक्त रास्ते मे काला नागदेवता जँगल की आग मे अधजला तङप रहा था,तेजाजी उसे भाले दवारा अग्नि से बाहर फेकते है लेकीन नाग नाराज होकर कहता है----------------------तेजा। मेरी जीवन सँगिनी चली गयी ,मै भी जल जाना चाहता था मगर तूने क्यो बचाया,मै तूझे डसूँगा,                                                                                                                        तेजाजी दवारा गाये छूङाकर वापिस बम्बी पर आने का कहने पर नागराज को विश्वास नही होता ,तब तेजाजी उसे सूरज-चाँद,सूखे खेजङे की सौगँध(साख )भराकर वचन देते है कि मै हर हाल मे वापिस लौटुँगा।                                                                                                                                     तेजाजी वचन देकर सुरसरा की घाटी मे पहूच जाते है,जहाँ चौरो के साथ घमासान होता है,150 चोरो को मार गाये मुक्त कराते है मगर वहाँ बहूत अधिक घायल हो जाते है,गाये गूजरी को सौपकर वचनबद्ध सँप की बम्बी पर पहूच जाते है,कुँवर तेजपाल की वचन बद्धतासे नाग अत्यधिक खुश होते है,वह तेजाजी को डसना नही चाहता है,मगर तेजाजी महाराज के आग्रह पर नागदेवता डसने के लिए तैयार होते है,मगर नागदेवता कहता है---------  (तेजा ...... तेरा पुरा शरीर लहुलुहान है ,कहाँ डसु, नागराज कुँवारी जगह बिना नही डसता।                       तब तेजाजी भाला जमीन मे गाङ अपनी हाथ कि हथेलीआ और जीभ पर डसने को नागराज को कहते है और नागराज-----सत्यवादी   वीर तेजाजी महाराज को सैँदरिया(ब्यावर,अजमेर )   गाँव मे डस जाते है मगर सुरसुरा गाँव(किशनगढ) मे सत्यवादी वीर तेजाजी महाराज 30 वर्ष की अवस्था मे ही भादवा सुदी 10,शनिवार,1160(28-8-1103) को गौरक्षार्थ की शहादत की खातिर वीर गति को प्राप्त हुँए ।                                                            आज सम्पूर्ण जाट वँशज वीर तेजाजी महाराज को अपने आराध्य देव,किसानदेव, के रूप मे पूजते है------बोलिए सत्यवादी झूँझार वीर तेजाजी महाराज की जय हो..........


जाट जाति की उत्पत्ति के सिद्धान्त



ramniwas choudhary(guru)(B.A.,B.ed.)

ज्येष्ठ शब्द से जाट - कुछ इतिहासकार जाट जाति की उत्पत्ति ज्येष्ठ शब्द से मानते है. ऐसी धरणा है कि राजसूय-यज्ञ करने के बाद युधिष्ठिर को 'ज्येष्ठ' घोसित किया गया था. आगे चल कर उनकी सन्तान 'ज्येष्ठ' से 'जेठर' तथा 'जेटर' और फ़िर 'जाट' कहलाने लगे. कुछ अन्य इतिहासकार मानते हैं कि पाण्डवों को महाभरत में विजय दिलाने के कारण श्रीकृष्ण को युधिष्ठिर की सभा में ज्येष्ठ की उपाधि दी गयी थी. अलबरुनी श्रीकृष्ण को जाट मानते हैं. (अलबिरुनी, भारत, पृ. 176).
शिव और जाट
एक अन्य सिद्धान्त के अनुसार शिव की जटाओं से जाट की उत्पत्ति मानी जाती है. यह सिद्धान्त देव संहिता में उल्लेखित है. देव संहिता की इस कहानी में कहा गया है कि शिव के ससुर राजा दक्ष ने हरिद्वार के पास कनखल में एक यज्ञ किया था. सभी देवताओं को तो यज्ञ में बुलाया पर न तो महादेवजी को ही बुलाया और न ही अपनी पुत्री सती को ही निमंत्रित किया. शिव की पत्नि सती ने शिव से पिता के घर जाने के लिये पूछा तो शिव ने कहा- तुम अपने पिता के घर बिना बुलाये भी जा सकती हो. सती जब पिता के घर गयी तो वहां शिव के लिये कोई स्थान निर्धारित नहीं था, न उनके पति का भाग ही निकाला गया है और न उसका ही सत्कार किया गया. ulte शिवाजी का अपमान किया और बुरा भला कहा गया. अपने पति का अपमान देखकर, पिता तथा ब्रह्मा और विष्णु की योजना को ध्वस्त करने के उद्देश्य से उसने यज्ञ-कुण्ड में छलांग लगा कर प्राण दे दिये. इससे क्रुद्ध शिव ने अपने जट्टा से वीरभद्र नामक गण को उत्पन्न किया. वीरभद्र ने जाकर यज्ञ को भंग कर दिया. आगन्तुक राजाओं का मान मर्दन किया. ब्रह्मा और विष्णु को यज्ञ से जाना पडा.
वीरभद्र ने दक्ष का सिर काट दिया. ब्रह्मा और विष्णु शिव को मनाने उनके पास गये. उन्होने शिव से कहा कि आप भी हमारे बराबर हैं. इस समझोते के बाद शिव और उसके गण जाटों को बराबर का दर्जा मिला. शिव ने दक्ष का सिर जोड दिया. कहते हैं कि दक्ष को बकरे का सिर जोडा गया था. यह भी धारणा है कि ब्राह्मण इसी अपमान के कारण जाटों का इतिहास नहीं बताते
jai maa jogmaya ki jaiiiiiiiiiiiiiii

प्रेषक आपका अजीज अनुज जाटबँधु    रामनिवास गुरू (बी.ए.,बी.एड ,)   मोबाईल न. 9950577920,8764304384,   दईकङा,,(सारण नगर,बनाङ रोङ,जोधपुर)